Monday, 13 October 2025

हेलो

 




भयंकर ताप और तेज़ धूप थी। और उससे भी तेज़ विनायक का गुस्सा। छोटे से गाँव में भर दोपहर में वह ठंडी पेप्सी ढूंढने निकला था। मगर गाँव के लोग दोपहर को दुकान बंद कर देते थे। उसने रेखा को समझाया था पर वह मानी ही नहीं।  


रेखा। चार साल दोनों एक साथ पढ़े थे। दोनों की दोस्ती एक हेलो से शुरू हुई थी। विनायक शांत स्वभाव का और रेखा गुस्सैल। कभी कभी तो लगता जैसे उसका बचपना गया ही नहीं। दोनों में बार बार झगड़ा होता और दोस्ती का अस्तित्व डगमगा जाता। फिर रेखा कॉल करती और “हेलो विनायक। सॉरी” कहती। विनायक गर्म तवे पर घी की तरह पिघल जाता और हेलो बोल देता। बोलना पड़ता। उससे रेखा से दोस्ती अच्छी लगती। और रेखा… 


विनायक की नज़र एक दुकान पर पड़ी। दुकानवाले से पूछा पेप्सी मिलेगी। उसने कहा चार बजे बाद आना। विनायक ने कहा “भाई, अभी दे दीजिए। सौ रुपए ले लीजिए”। दुकानवाले ने पेप्सी दी और विनायक का फोन बजा। रेखा थी। बोली “हेलो विनायक। सॉरी”। और विनायक बोला 


“जाओ तुमसे हेलो ही नहीं करना मुझे!”


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